
पल भर का सफ़र
चल रहा रोशनी की तलाश में,दिखा एक प्रकाश पुंज.
जुगनुओं का क्षणिक ओज , हुआ विहीन निशा में गुम .
लंबा है सफर, पग धुंधली सी.
जीवन की सरल राहें, लगी उलझी सी.
अंधियारी में गुमने का डर, रुका रोशनी की आश में.
लगा उन्हें पल भर का सफर, छोड़ गए अरचित इतिहास में.
सागर सा अथाह, भावनाओं का विचार स्पंदन.
दिल की गहराई में, कचोटती असीमित रुदन.
बरखा आए, नए जीवन की आश में.
सब कुछ बह गया, भटक रहा जीवन की तलाश में.
अब भी आशा है, उसमे रम जाने का.
सूखे फूल से, फिर महक आने का.
हे ! भगवन ! उसपे अन्तर्निहित सारा जीवन.
वर दे कुछ ऐसा, टूट जाए करुड़ क्रंदन.
nice buddy.....
ReplyDeletei liked the second last para the best...
ReplyDeleteअब भी आशा है, उसमे रम जाने का.
सूखे फूल से, फिर महक आने का.
keep writing :)
gam na karo gamo ka, K gam abhi baki hain
ReplyDeleteDube ho dariya me, k samandar abhi baki hai......
palchhin ek pal ka, pal-pal bikharta hai
bikhare hue palon me,zindagi abhi baki hai.......