
अनकही बातें
अश्क की लडियां ये पूछे
बेवफा नयन से -
देखे तू सारा जहां,पर तुझे न मिला एक निशाँ ।
जीवन के हर उंच-नीच पर, मैं हमेशा गिरता रहा ॥
नयन बोले नादाँ अश्क से, है बड़ी तू बेखबर ।
हर रंज सहता रहा, पर तुझे न आये नजर ॥
अहसास हुआ न ख़ुशी इतना, कि तू बहकर चला गया ।
हुआ जो गम का सामना, तेरी घूंट पीकर हँसता रहा ॥
ख़ुशी हो या गम के आँशु, किसी को न आये नजर ।
दुनिया के भीड़ में फिर से, घूम रहा मैं बेखबर ॥